आज सुभह बड़ा विचित्र घटना घटी । आप सोच रहे होंगे की ऐसा क्या खास हुआ की मै इसे बताने के लिए इतना उत्साहित हूँ तो इसके लिए आपको पूरा बात समझना होगा घटना सच में रोचक है ।
हमारे परोस में एक वृद्ध महिला अपने पोती के साथ रहती है । उनका उम्र लगभग 50 साल के आसपास होगा उनका स्वभाव बड़ा ही रोचक है । सायद उम्र या फिर कोई निजी कारन के वजह से उनका स्वभाव काफी चिडचिडा है । हम सब उनको आदर तथा दहसत से दादी बुलाते है । उनका चिडचिडापन स्वभाव तथा कटु वचन का चर्चा इसलिए कर रहा हूँ क्योकि मेरे कमरा के बगल में ही उनका कमरा है जिसके वजह से उनके इस स्वभाव तथा कटु वचन का प्रहार हम सब पर होते ही रहता है और हम सब इस प्रहार को झेलते है क्योकि वे पडोसी के साथ साथ हमारे मकान मालकिन भी है ।
आज सुबह जब मै उनको अपने फ्लेट मैं प्रवेश करते देखा तो मेरा कदम सकपका गया । उनके हाथों मैं एक लोटा था । शायद वह तुलसी को जल अर्पित कर सीधे हमारे फ्लेट में आ रही थी । उनका आँख क्रोध से लाल था । चेहरा पर क्रोधाग्नि प्रज्ज्वलित थी । मैं सामने था तो सुरुआत मुझसे ही हो गयी । मैं सोचने लगा कि आज उठते ही किसका चेहरा देखा । आप सोच रहे होंगे की मैं इतना क्यों डर रहा हूँ जैसे मेरे सामने ऊंगलिमाल डाकू तलवार लिए खड़े हों । तो मैं आपको बता दू कि, हमारे दादी का क्रोध रूप ऊंगलिमाल डाकू से कम खतरनाक नहीं है । बात रही तलवार की तो, उसका मुकाबला कोई भी सामान जो दादी के हाथ में हो वह कर लेता है । दादी के शुभ वचन सुनते ही मेरे सभी सहपाठी बाहर निकले । लेकिन मैं उनमे सबसे आगे खड़ा पाया क्योंकि वे सब पीछे ही रुके रहे । दादी का क्रोध बढ़ता जा रहा था । लेकिन तब तक मुझे मामला समझ में आ गया । हुआ ये था कि मेरे एक सहपाठी ने दादी के घर जाकर दादी की पोती का सिकायत कर दिया था । उसका कहना था की उनकी पोती देर रात तक फ़ोन पर जोर जोर से बातें करती है और कमरा एक साथ होने क कारन आवाज आते रहता है जिससे पढाई करने में दिक्कत होती है । और इसका जवाबी कार्यवाही करने के लिए दादी हमारे यहाँ पधारी थी । दुर्भाग्यवस मैं सामने आ गया और उनके वचन प्रहार का शिकार हो गया । मैं अपने सभी सहपाठियों के तरफ देखा । सभी चुप थे मुझे लगा की मैं उनके कटु वचन के प्रहार को अपने समझदारी के ढाल से रोक लूँगा लेकिन मैं असफल रहा । उनका क्रोध इस प्रकार फूट रहा था जैसे उनके पोती का अपहरण हो गया हो और वो अपहरानकर्ता मैं हूँ । उन्होंने कहा मैं इस लोटे (जो उनके हाथ में था) से तुम सब का सर फोड़ दूंगी ..... मुझे नहीं रहा गया और भावनाओं में बहकर मैंने बोल दिया कि ठीक है फोड़ दीजिये मेरा सर । इतना कहते ही उनका आँख बड़ा होने लगा । हाथ लोटे को कास कर पकड़ने लगा मैं अपने सहपाठियों के तरफ देखा तो वे लोग मुझे पहले से पांच कदम पीछे नजर आये । ये सब देखकर मुझे पूरा विस्वास हो गया की मै वह वाक्य बोलकर गलती कर दी । मैं अपने दोनों हाथों को सर पर रखा ( अपने सुरक्षा के दृष्टिकोण से ) लेकिन इतने में अचानक दादी का क्रोधित चेहरा भाव शून्य हो गया । और वो सहज भाव से मेरे तरफ देखी और चुपचाप चली गयी । उनके भावना का अचानक बदलाव तो तत्काल मुझे समझ नहीं आया लेकिन बाद में समझ गया ।
लोग सायद ठीक ही कहते है की क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता है। आदमी चाहे कितना भी क्रोधित क्यों न हो आप सहजता से एक वाक्य बोलकर उसके क्रोध को करुना में परिवर्तित कर सकते है तथा उसे उसके गलतियों का एहसास करा सकते है।
Written by:-R.K.JHA
Nice sir
ReplyDelete