ये है राहुल, इनको सुबह देर तक सोने की आदत है. जिसके कारन ये शायद हि कभी वो कॉलेज में अपनी क्लास अटेन्ड कर पाते है. अभी वो अपने ही शहर में अपनी माँ और पापा यानि मिस्टर और मिसेज शर्मा के साथ रहते है. अपने माँ बाप के वो इकलोते संतान है तो जाहिर है कि उनको बड़े ही लाड प्यार से पाला गया है. मिस्टर शर्मा ऑफिस में काम करते है तो उन्हें अपने लाडले की कोई खास खबर नहीं होती है. वो अपने समय से उठते है. उनकी धर्म पत्नी मिसेज शर्मा उन्हें चाय देती है, उनके लिए नास्ता तैयार करती है. मिस्टर शर्मा पेपर पढ़ने के बाद तैयार होकर ऑफिस के लिए निकलते है अपनी बीबी के हाथों का बना बनाया जो कुछ भी टिफ़िन में पैक होता है उसे लेकर. अक्सर टिफ़िन में उनके पसंद का सामान ही होता है.
आज राहुल का बर्थडे है. वो अब तक सोया हुआ है. सुबह के आठ बज चुके है. माँ राहुल को उठाने आती है, बेटा राहुल, उठ जा आज तुम्हारा जन्म दिन है, कम से कम आज तो सबेरे उठ जा. राहुल - क्या माँ आज जन्म दिन है तो क्या? माँ ने खिड़की के परदे को सरका दिया था जिससे उसके कमरे में रोशनी आ गयी वो चिल्लाने लगा क्या माँ सुबह सुबह कोई कम नहीं मिला क्या तुम्हे. माँ- अरे बेटा आज सबेरे उठ जा, फ्रेश होकर आओ देखो क्या सब नास्ता बनाया है.
राहुल जबरदस्ती उठा और तैयार होकर फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल पर आया और नास्ता में आलू के पराठे को देख कर माँ को बोलने लगा क्या माँ ये क्या फिर से तुमने पराठे बना दिए तुम्हे पता है न मुझे ये पसंद नहीं है. फिर माँ ने बड़े ही प्यार से कहा बेटा तुम्हारे पापा को ये बहुत पसंद है इसीलिए बनाया मैंने मुझे लगा तुम्हे भी पसंद आएगा. राहुल उठ कर निकल गया बहार, माँ मै जा रहा हूँ दोस्तों के साथ. माँ अन्दर से ही आवाज़ लगायी ठीक है जा लेकिन सबेरे आ जाना. राहुल ने जाते हुए ही जवाब दिया ठीक है.
शाम का समय आया माँ ने घर को बहुत ही अच्छे से सजाया. माँ ने केक मंगवाया था, केंडल मंगवाया था. अच्छी अच्छी मिठाईयां और पकवान बनाया था. वो आज बहुत खुश थी, आखिर उसके बेटे का जन्मदिन था. वो राहुल का इंतजार करने लगी. शाम के सात बज चुके थे. राहुल नहीं आया था. माँ ने उसे फ़ोन किया. उसने नहीं उठाया. माँ सोच रही थी कि हो सकता है किसी काम में उलझा होगा राहुल, काम ख़तम होने के बाद मुझे कॉल बैक करेगा. साढ़े सात बज गए कॉल नहीं आया. माँ ने फिर से कॉल किया. हैल्लो, उधर से आवाज आई, माँ बोलो क्या बात है? माँ ने कहा बेटा कहाँ है तू मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ, तू कितनी देर तक आएगा ? राहुल ने झल्लाते हुए जवाब दिया अरे माँ मैंने कहा था न मैं अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा हूँ, थोड़ी देर में आता हूँ. माँ ने फ़ोन रख दिया. थोड़ी देर बाद मिस्टर शर्मा आये. उनको देखते हि माँ कहने लगी देखिये ना मैंने कितनी सजावट की है, अच्छी है न? और अभी तक राहुल नहीं आया है, मैं कब से उसका इंतजार कर रही हूँ. पता नहीं कहता है कि दोस्तों के साथ हूँ. मिस्टर शर्मा ने कहा, अरे यार मैंने तुम्हे कितनी बार कहा है की राहुल अब बड़ा हो गया है. क्यों कर रही हो ये सब? आज मैं बहुत थक चूका हूँ, आज बहुत सारा काम था मुझे ऑफिस में. मुझे खाने को दो मुझे सोना है. मिस्टर शर्मा खाने के बाद सो गए. माँ तो ठहरी माँ वो अब भी राहुल का इंतजार कर रही थी.
करीब ग्यारह बजे डोर रिंग बजी. माँ के आँखों में चमक आ गयी. राहुल ने आने में बहुत देर कर दी थी, लेकिन माँ फिर भी खुश थी. उसे कोई गिला नहीं था. उसने चहकते हुए कहा कहाँ रह गए थे बेटा? देखो मैंने घर को कितनी अच्छी तरह सजाया है, चलो जल्दी जल्दी फ्रेश हो जाओ, केक पिघल रही होगी जल्दी आओ केक काटते है. राहुल ने कहा क्या माँ तुम भी इन सब के चक्कर में पड़ी हो अब तक? माँ मैं अब बड़ा हो गया हूँ. मैंने दोस्तों के साथ बर्थडे मना लिया. माँ का मन उदास हो गया. ऐसा नहीं था की माँ पहली बार उदास हुई थी. अब तो वो हमेशा उदास रहने लगी थी लेकिन उसने कभी अपने चहरे पर उदासी की झलक भी नहीं आने देती थी.
एक दिन उसका बेटा अपने दोस्तों के साथ टूर पर गया था. माँ को याद आया की राहुल ने कभी किसी लेटर के बारे में जिक्र किया था. उसने बहार जाकर ड्रॉप बॉक्स में देखा. लेटर आया था. उसने राहुल को कॉल किया. बेटा राहुल तुमने जो लेटर के बारे में पूछा था न वो आ गया है. राहुल उछल पड़ा उसने चहकते हुए कहा माँ देखो तो उसमे क्या लिखा हुआ है? फिर उसने कहा छोडो माँ वो तो इंग्लिश में लिखा होगा तुमसे नहीं होगा पढ़ने, माँ का मन फिर उदास हो गया वो कुछ भी नहीं बोल पाई. मैं कल आ रहा हूँ. इतना कहते ही राहुल ने फ़ोन कट कर दिया. राहुल ने डिजाइनिंग के कोर्स के लिए अप्लाई किया था. उसी का एडमिशन लेटर आया था. अगले दिन वो निकलने वाला था. मार्केटिंग भी हो चुकी थी. माँ ने पूछा और कुछ चाहिए तुम्हे? कल तक का समय है तुम्हारे पास कुछ भी चाहिए हो तो बता देना मैं मंगवा दूंगी. जाते वक़्त तक उसके दोनों बैग भर चुके थे. माँ ने अचार, चुरा का फ्राई, खजूर और भी ढेर सारा सामन पैक कर दिया था. कभी अगर भूख लगे तो खा लेना. माँ उसके बैग को उठाकर स्टेशन तक पहुचाया. उसके माँ और पापा दोनों उसके साथ ट्रेन में बैठे थे. माँ उसे समझा रही थी. देखो वहां पर किसी से लड़ाई झगडा मत करना, रस्ते में कोई कुछ दे तो मत लेना. मैंने कुछ खाने का सामान रख दिया है बैग में भूख लगने पर खा लेना. राहुल तंग आकर कहता है ठीक है माँ मैं बच्चा नहीं हूँ, मैं जानता हूँ. चलो अब आपलोग जाओ ट्रेन खुलने वाली है. इतने मैं ट्रेन ने सिटी मारी वो दोनों उतर गए पापा स्टेशन पर ही खड़े थे पर माँ ट्रेन के साथ दौड़ लगाती रही जब तक की प्लेटफार्म ख़तम न हो गया और चिल्लाती रही बेटा समय से खाना खाना. सुबह सबेरे उठ जाना. समय से सो जाना. कॉल भी करते रहना और हाँ पहुचते ही कॉल जरूर करना.
उसके पापा, माँ, स्टेशन, गाँव, शहर सभी पीछे छुट गए थे. वो कॉलेज पंहुचा. सब बहुत बढ़िया था हॉस्टल के खाने के सिवाय. हॉस्टल का खाना उसे नहीं पसंद था. एक दिन उसने तंग आकर हॉस्टल के इंचार्ज के पास शिकायत की.उसके पास तो एसी शिकायतें आती ही रहती थी. शिकायत सुनकर उसके कानो पर जूं तक न रेंगी. उसने राहुल से कहा बेटा खाना है तो खा ले वरना एक-दो दिन भूखे रहोगे न तो सब अच्छा लगने लगेगा. राहुल जाकर जो कुछ भी था थोडा सा खा लिया. भूख के आगे क्या चलती उसकी. वो मजबूर था. एक दिन वो खाने के लिए लेट से पंहुचा खाना ख़त्म हो चूका था. वो मायुस हो चूका था. आज पहली बार उसे घर की याद आ रही थी. वो रूम पंहुचा वह उसके रूम मेट उसका सारा सामान को बिखेर दिया था जो कुछ उसकी माँ ने दिया था खाने के लिए वो सब खा रहे थे. एक दोस्त ने कहा सॉरी यार भूख बहुत लगी थी इसलिए हमलोग खा लिए आओ तुम भी खाओ. बहुत ही अच्छा है. वाह माँ के हाथो का बना हुआ खाना याद आ गया. आज पहली बार उसका बैग खुला था उसने आज तक देखा भी नहीं था कि माँ ने क्या सब भेजा है. उसे माँ की याद आ रही थी.
तीन महीने बीत चुके थे वो घर जा रहा था. स्टेशन पर माँ आई थी. उसे लेने के लिए. वो माँ को प्रणाम करने के लिए झुका ही था की माँ ने कहा अरे अरे बेटा हो गया हो गया रहने दो. माँ ने बैग उठा लिया. नहीं नहीं माँ रहने डो मैं उठा लेता हूँ. उसे माँ की कीमत का पता लग चूका था. उसने माँ के हाथों से बैग ले लिया. माँ तू स्टेशन क्यों आ गयी मैं तो घर आ ही रहा था. माँ ने कहा क्या करू बेटा तीन महीने हो गए थे तुझे देखे हुए मैं रोक नहीं पायी अपने आप को. तू कभी कॉल भी तो नहीं करता था. वो तो मैं ही कर लेती थी तो तू बात भी करता था. दोनों घर पहुचे. माँ बहुत खुश थी. अगले सुबह राहुल जल्दी उठ गया. माँ ने पूछा क्या हुआ बेटा कोई दिक्कत हुई क्या सोने में, इतना जल्दी क्यों उठ गया थोड़ी देर और सो लेता. नहीं माँ अब देर तक सोने की आदत नहीं है, वह सुबह का नास्ता सबेरे मिलता है देर तक सोऊ तो नास्ता छुट जाता है इसलिए अब सबेरे उठने की आदत हो गयी है, राहुल ने कहा. माँ कहती है ठीक है बेटा जा तू जल्दी से फ्रेश होकर आ जा मैं तेरे लिए नास्ता तैयार करती हूँ.
राहुल नहा कर आता है, उसकी माँ उसके लिए किचेन से नास्ता लेकर आती है, ये क्या वो माँ को देखकर दंग रह जाता है माँ ऊपर से निचे तक पुरे रसोईये के लिबास में एप्रन पहने हुए आती है, और नास्ता की ट्रे राहुल के सामने रखते हुए बोलती है "Hey this is your favourate pasta, injoy it my son." राहुल आश्चर्य से माँ के और देखता है. माँ कहती है बेटा तेरे जाने के बाद खली बचे समय में मैंने इंग्लिश का क्लास ले लिया था, और मैंने सेफ का भी क्लास कर लिया ताकि मैं तेरे लिए पास्ता,चिकन चिली, चिकन कोरमा, पनीर चिली सरे डिश बना सकूं. राहुल की आँखें भर आई वो उठा और माँ से लिपट कर रोने लगा, और कहने लगा माँ मैं तुमसे दूर रहकर तुम्हारे महत्व को समझा, आई ऍम सॉरी माँ. तुम्हे मेरे लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं है. तेरे हाथ के बने आलू पराठे ही मुझे पसंद है. दोनों एक दुसरे को गले लगा कर रोने लगे. उन दोनों के आँखों में ख़ुशी के आंसू थे.
अपनों से दूर होने के बाद ही उनकी महत्ता हमें समझा में आती है, इसलिए कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए खाश कर माँ का.....
WRITTEN BY- ASHWINI JHA
EDITOR- RITESH JHA

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