कभी रुला रही है
कभी हंसा रही है
मेरी जिंदगी
मेरी मां की तरह सिखा रही है
किसी को रंग रूप से बदला
किसी को पद प्रतिष्ठा से बदला
किसी को नाकामयाबी से बदला
तो किसी को कामयाबी से बदला
.....पर वक्त ने सबको बदला
कई रिश्ते नाराज हैं
फिर भी वो ईतरा रही है
मेरी जिंदगी
मेरी मां की तरह सिखा रही है
Written by pradeep kr.

0 coment�rios:
Post a Comment